21 जनवरी को हिंदू कैलेंडर के अनुसार, विक्रम संवत 2077 में पौष मास की शुक्ल पक्ष अष्टमी तिथि। दिन गुरुवार (गुरुवार) और अष्टमी तिथि अपराह्न 3:21 बजे समाप्त होगा, उसके बाद शुक्ल पक्ष नवमी तिथि शुरू होगी और 22 जनवरी, शाम 5:31 बजे तक रहेगी। सूर्योदय सुबह 7.14 बजे और सूर्यास्त के बाद होगा। शाम 5.51 बजे चिह्नित किया जाएगा। इस दिन को शाकम्भरी नवरात्रि की शुरुआत भी होती है जो पौष शुक्ल अष्टमी से शुरू होती है, जिसे पौष बन्दा अष्टमी के नाम से भी जाना जाता है, और पौष मास की पूर्णिमा के दिन समाप्त होता है।
हिंदू मान्यताओं के अनुसार, शाकंभरी माता देवी भगवती का अवतार हैं और पृथ्वी पर अकाल और खाद्य संकट को कम करने के लिए उनकी पूजा की जाती है। वह सब्जियों, फलों और हरी पत्तियों की देवी के रूप में जानी जाती हैं। शुभ मुहूर्त, पूजा मुहूर्त और अन्य विवरण यहां पढ़ें:
· सूर्योदय का समय- सुबह 7.14 बजे
· सूर्यास्त का समय- शाम 5.51 बजे
· चंद्रोदय समय- दोपहर 12.14 बजे
· Moonset समय- 1.27 बजे, 22 जनवरी
तीथि, नक्षत्र और राशी विवरण:
21 जनवरी को अष्टमी तिथि दोपहर 3.21 बजे तक रहेगी और गुरुवार को दोपहर 3:31 बजे तक नक्षत्र अश्विनी या अश्विनी रहेगा। इसके बाद, 22 जनवरी को शाम 6:08 बजे तक भरणी नक्षत्र शुरू हो जाएगा और सूर्य मकर (कैपरीकोर्न) राशी में रहेगा, जबकि चंद्रमा कुछ और दिनों के लिए मेष (मेष) राशी में रहेगा।
21 जनवरी के लिए शुभ मुहूर्त:
अभिजीत मुहूर्त को वैदिक ज्योतिष में सबसे शुभ और शक्तिशाली मुहूर्त माना जाता है। यह सुबह 11.45 से दोपहर 12.30 बजे तक चलेगा।
21 जनवरी के लिए अशुभ समय:
वैदिक ज्योतिष में राहु कलाम को सबसे अशुभ समय माना जाता है और यह दोपहर 1.30 से शुरू होकर 2.51 बजे तक रहेगा। लोग आमतौर पर किसी भी नए काम को शुरू करने या शुभ कार्यों के लिए बाहर निकलने से बचते हैं।
हिंदू मान्यताओं के अनुसार, पंचांग उसी दिन की योजना बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। हिंदू अपना काम शुरू करने के लिए शुभ और अशुभ समय मानते हैं। भक्त विभिन्न प्रयोजनों के लिए चंद्र के साथ-साथ सौर कैलेंडर का भी पालन करते हैं।

