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उत्तर प्रदेश में ‘प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी)’ की जमीनी हकीकत: नगर निकायों (ULBs) के सिंडिकेट से उठते गंभीर सवाल।

ग्राउंड रिपोर्ट: प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY-शहरी) का मुख्य ध्येय समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े उस गरीब नागरिक को पक्की छत मुहैया कराना है, जो दशकों से झोपड़ियों और कच्चे मकानों में ज़िंदगी बिताने को मजबूर है। हालांकि, उत्तर प्रदेश के कई जिलों में यह महत्वाकांक्षी योजना प्रशासनिक लालफीताशाही और नगर निकायों (Urban Local Bodies – ULBs) के निचले तंत्र में पनपते भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती दिख रही है।

हालिया विभागीय जांचों और समाचार तंत्र की रिपोर्टों से साफ हुआ है कि जहां एक तरफ सरकार ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ का दावा करती है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय स्तर पर बिचौलियों, कर्मचारियों और निकाय अधिकारियों का सिंडिकेट गरीबों का हक छीनने में जुटा है।

गरीब के सिर पर छत केवल एक ईंट-सीमेंट का ढांचा नहीं, बल्कि उसका स्वाभिमान और सुरक्षा का दायरा है। शहरी स्थानीय निकायों में जमा यह भ्रष्टाचार न केवल केंद्र व राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं की साख को बट्टा लगाता है, बल्कि देश के सबसे कमजोर वर्ग के भरोसे को भी तोड़ता है। समय आ गया है कि इस तंत्र की सफाई केवल कागजी जांच तक सीमित न रहकर, निर्णायक कार्रवाई के रूप में धरातल पर दिखे।

Written by Chief Editor

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