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मोदीनगर में अपनी ही बनायी सड़क को खाली नहीं करवा पा रहा प्रशासन |

क्या प्राइवेट जमीन पर नगर पालिका मोदीनगर ने किया है सरकारी धन से सड़क का निर्माण ?

शिकायतकर्ताओं द्वारा शिकायत को ट्विटर पर पोस्ट करके उच्च अधिकारियों को टाइप किया जा रहा है जिसके अनुसार 28 जुलाई को नगर पालिका परिषद मोदीनगर में रोड पर चल रहे अवैध अतिक्रमण की सूचना नगर पालिका परिषद मोदीनगर को दी, पर नगर पालिका परिषद मोदीनगर ने कोई कार्यवाही नहीं की जिससे अतिक्रमण रोका जा सकें | अतिक्रमण कर्ता  के विरुद्ध जनसुनवाई पोर्टल पर एंटी भू माफिया में भी शिकायत 41014022000135 दर्ज है जिसे तहसील ने पुराने खसरा में प्राइवेट भूमि दर्ज होना बताकर बंद कर दिया । लेकिन यह नहीं बताया गया कि प्राइवेट ज़मीन पर नगर पालिका परिषद मोदीनगर  ने सड़क निर्माण कार्य कैसे किया ? 

शिकायतकर्ताओं द्वारा सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर चल रहे क़ब्ज़े की शिकायत फिर मेरठ मंडलायुक्त को की गयी जो उन्होंने ज़िलाधिकारी ग़ाज़ियाबाद को 19 जुलाई को पत्र लिख स्थलीय निरीक्षण कर अबैध क़ब्ज़ा / अतिक्रमण पाये जाने की स्थिति में उसे हटवा कर एक सप्ताह के अन्दर सूचित करने को निर्देशित किया गया  । जिस के क्रम में नगर पालिका परिषद मोदीनगर को पत्र लिखा गया लेकिन मडलायुक्त के एक सप्ताह के अंदर कार्यवाही के आदेश की अनदेखी कर नगर पालिका परिषद  मोदीनगर ने एक माह बाद 16 अगस्त को उपजिलाधिकारी मोदीनगर से पुलिस आदि की माँग की और बताया कि नगर पालिका द्वारा निर्मित रोड के टाइल्स को उखाड़ कर अतिक्रमण किया जा चुका है । इस एक माह में तेज़ी से अतिक्रमणकर्ता ने  रोड के फुटपाथ को सड़क से ऊपर उड़े चबूतरे में प्रवर्तित कर उस पर कार पार्किंग व गार्डन बना लिया गया । जबकि मडलायुक्त मेरठ के पत्र ज़िलाधिकारी ग़ाज़ियाबाद को एक सप्ताह में रिपोर्ट माँगी थी । नगर पालिका परिषद मोदीनगर ने 16 अगस्त को तहसील के उपजिलाधिकारी मोदीनगर से अतिक्रमण हटाने के लिए पुलिस व मजिस्ट्रेट की मांग करके फाइल बंद कर दी |शिकायतकर्ताओं द्वारा ग़ाज़ियाबाद पुलिस को जनसुनवाई पर शिकायत संख्या 40014022034315 पर शिकायत करने पर थाने ने रिपोर्ट लगाई कि अतिक्रमण की शिकायत सही है और कार्यवाही नगर पालिका परिषद मोदीनगर पर पेंडिंग बतायी | इस प्रकरण में सीओ मोदीनगर में पुलिस कप्तान को रिपोर्ट दी कि जब नगर पालिका परिषद मोदीनगर अतिक्रमण हटाने के लिए पुलिस मागेंगी तो उपलब्ध करवा दी जायेगी ।

इसके बाद भी जब लंबे समय तक अतिक्रमण नहीं हटा फिर शिकायतकर्ताओं द्वारा दोबारा अतिक्रमण हटाने के लिए मांग की गई । जिस पर नगर पालिका परिषद मोदीनगर ने जनसुनवाई पोर्टल पर रिपोर्ट लगायी कि  अतिक्रमण कर्ता  सिविल न्यायालय में चला गया।इस पर शिकायतकर्ता का कहना कि है कि कुछ अधिकारियों नगर पालिका परिषद मोदीनगर की मिलीभगत से ही अतिक्रमण कर्ता ने सिविल वाद डाला है क्योंकि जिस भूमि के लिए उस में नगर पालिका परिषद मोदीनगर पर केस किया है उसका बैनामा भी अतिक्रमणकर्ता के नाम नहीं है । और उस स्थान पर पूर्व में नगर पालिका परिषद मोदीनगर द्वारा रोड बनाया गया था जिसे उखाड़ कर पार्किंग व  चबूतरा बनाकर अतिक्रमण  किया गया है फिर भी नगर पालिका परिषद मोदीनगर प्रशासन कोई कार्यवाही नहीं कर रहा। 

जब सिविल वाद के कारण अतिक्रमण हटाने की शिकायत पोर्टल पर प्रशासन द्वारा बंद की जाने लगी तब । अतिक्रमण करने के लिए अतिक्रमण कर्ता ने सरकारी धन से निर्मित सड़क को उखाड़कर अपना प्राइवेट पार्किंग , चबूतरा व गार्डन बना ली । इसलिये अब शिकायतकर्ताओं ने सड़क तोड़ने के लिए  सार्वजानिक संपत्ति के नुकसान पर 3/4 सार्वजनिक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम के अंतर्गत त्वरित कार्यवाही कराने के संबंध में मंडलायुक्त महोदय को प्रार्थना पत्र दिया है जिसकी जांच रिपोर्ट मंडलायुक्त महोदय ने जिलाधिकारी गाजियाबाद को करके तत्काल कार्रवाई कराने हेतु निर्देशित किया है। वही दिनांक 19 अक्टूबर को दी गई शिकायत में उच्च अधिकारियों से निम्नलिखित बिंदुओं पर जांच की मांग की है और अतिक्रमण हटाने का अनुरोध किया है।

  1. किसी नगर पालिका परिषद द्वारा प्राइवेट भूमि पर सरकारी पैसे का उपयोग कर किसी के निजी उपयोग के लिए सड़क, फुटपाथ व नाली का निर्माण नहीं किया जा सकता है | नगर पालिका परिषद मोदीनगर मोदीनगर द्वारा मोदी मिल्स के साथ किसी राजीनामे अथवा समझौते के तहत मोदी कॉलोनी के योगेन्द्र पार्क (सतीश पार्क के अन्दर) में सड़क, फुटपाथ व नाली का निर्माण कराया गया तो उसकी देख रेख व अतिक्रमण मुक्त रखने की जिम्मेवारी नगर पालिका परिषद मोदीनगर है | अगर नगर पालिका परिषद मोदीनगर द्वारा प्राइवेट जमीन पर किसी के निजी उपयोग के लिए सरकारी पैसे से कार्य कराया गया है तो इस संबंध में दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करवाने का कष्ट करें। अन्यथा तत्काल अतिक्रमण हटवाने का कष्ट करें । 
  2. श्री विनोद, निवासी कोठी न0-7 योगेंद्र पार्क (सतीश पार्क के अंदर)  ने  नगर पालिका मोदीनगर द्वारा निर्मित उसकी कोठी न०-7 की बाएं हाथ की ओर दीवाल से लगी नाली को ख़त्म करके, तथा फूटपाथ को मूल स्वरुप बदलकर उसे सड़क से ऊचा चबूतरा बनाकर, उस पर टीन शैड लगवा दिया है जिसका प्रयोग निजी पार्किंग में करना चाहता है । निवासी कोठी न0-7 योगेंद्र पार्क इस टीन शैड को मकान खरीदने से पहले का और मकान का हिस्सा बता कर निजी संपत्ति बता रहा है | लेकिन इसने हाल में ख़रीदी इस ज़मीन की रजिस्ट्री में टीन शैड आदि का स्टांप जमा नहीं किया है | जो साफ़ साफ़ स्टाम्प चोरी का प्रकरण है | इस शिकायत पर जिला प्रशासन ने ना कोई मुकदमा और ना हीं कोई शिकायत दर्ज की है | और इस स्टाम्प ड्यूटी की चोरी के मुक़दमे का सिविल वाद से कोई संबंध नहीं है | अतः अगर यह टीन शैड इसकी निजी सम्पत्ति पर निर्मित है तो तत्काल स्टाम्प चोरी का मुक़दमा दर्ज कराने का कष्ट करें | अन्यथा इसे तत्काल हटवा दिया जाएँ । 
  3. गाज़ियाबाद प्रशासन में तैनात कुछ भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत से नगर पालिका परिषद मोदीनगर कोई पैरवी न करने व मुक़दमे को लम्बा खीचने के समझौते पर नगर पालिका मोदीनगर  द्वारा ही विनोद को खुद (नगर पालिका मोदीनगर) के विरुद्ध ही एक सिविल वाद  डालने की सलाह दी गई है जिस पर विनोद, निवासी 7 योगेंद्र पार्क (सतीश पार्क के अंदर) द्वारा वाद डाला गया है (यह वाद भी पूर्व में विभिन्न न्यायालयों में नगरपालिका मोदीनगर के साथ चल रहे बाद से सम्बंधित है ) जिससे शिकायत पर आपके कार्यालय के निर्देश का अनुपालन न करने का बहाना गाजियाबाद प्रशासन को मिल जाये और सरकारी धन से निर्मित नगर पालिका मोदीनगर के फुटपाथ,  सड़क व नाली पर अवैध अतिक्रमण जारी रखने दिया जा सके | 
  4. नगर पालिका मोदीनगर अभी तक इस वाद में कई तारीख पड़ने के बाद भी अपना पक्ष रखने को प्रस्तुत नहीं हो रही है ताकि वाद अतिक्रमण कर्ता के पक्ष में हो सके | वाद को लम्बे समय तक खीचने के लिए नगर पालिका मोदीनगर अतिक्रमण कर्ता के साथ मिलकर सिविल न्यायालय के समक्ष अवास्तविक स्थिति प्रस्तुत न कर सकें इसके लिए इस सिविल वाद की पैरवी जनपद / मंडल स्तर से की देख रेख में किसी विद्वान अधिवक्ता द्वारा कराई जाने का कष्ट करें जिससे सार्वजनिक संपत्ति को यथाशीघ्र मुक्त कराया जा सके |
  5. अतिक्रमण की गयी सड़क वर्तमान में नगर पालिका मोदीनगर की देखरेख में आने के बाद अतिक्रमणकर्ता के पास फुटपाथ पर अधिकार सिद्ध करने वाला कोई सरकारी दस्तावेज उपलब्ध नहीं है | क्योंकि यह फर्जी सिविल वाद अतिक्रमण कर्ता द्वारा नगर पालिका मोदीनगर व प्रशासन की मिलीभगत से ही किया गया है अतः प्रशासन अनेक विधि विरुद्ध कार्यो में लगे अतिक्रमण कर्ता की जाँच कराते हुए व कम स्टाम्प आदि से सम्बंधित प्रकरणों  की जाँच कर सकता है  । अतः तत्काल अतिक्रमण हटवाने का कष्ट करें ।
  6. इस संबंध में जिलाधिकारी गाजियाबाद को संबोधित करते हुए आपके कार्यालय ने  पत्र द्वारा दिनांकः 19-07-22 को नियमनुसार कार्यवाही कर 7 कार्यदिवस में सूचना उपलब्ध कराने हेतु निर्देशित किया गया था परंतु सिविल वाद दायर कर करने से पूर्व दो-तीन महीने निकल जाने के बाद भी जिलाधिकारी गाजियाबाद द्वारा मंडलायुक्त कार्यालय के पत्र पर निजी संज्ञान होने के बाद भी कोई कार्यवाही क्यों नहीं की गई । इस तथ्य भी जाँच की जाये |
  7. अतिक्रमण न हटवाने की दशा में गाजियाबाद प्रशासन द्वारा कूटरचित  तरीके से अवैध अतिक्रमण को विवादित कर संरक्षण देने के लिए ज़िम्मेवार अधिकारियों व कर्मचारियों के विरुद्ध सरकारी संपति को विवादित करने व उच्च अधिकारियों के आदेशों की अनदेखी करने व अपने पदेन कार्यों का सुचिता से निर्वहन न करने के लिए विभागीय कार्यवाही प्रस्तावित की जावें ।

Written by Chief Editor

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