मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने मंगलवार को एक जनहित याचिका पर केंद्र और राज्य से जवाब मांगा, जिसमें सरकारों को सैनिटरी नैपकिन और डायपर निर्माताओं को रैपर पर इस्तेमाल की गई सामग्री का अनिवार्य रूप से खुलासा करने के निर्देश जारी करने का निर्देश देने की मांग की गई थी।
अदालत पलायमकोट्टई के एस. अय्या द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। उन्होंने कहा कि सैनिटरी नैपकिन और डायपर बनाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री का खुलासा किया जाना चाहिए और उत्पाद के रैपर पर उल्लेख किया जाना चाहिए ताकि यह पता चल सके कि उत्पाद सुरक्षित है या नहीं। उन्होंने कहा कि लोग स्वच्छता के महत्व का विश्लेषण करने के बजाय विज्ञापन, लागत और पैकेजिंग के चक्कर में पड़ जाते हैं।
याचिकाकर्ता ने कहा कि सरकारों ने मासिक धर्म स्वच्छता योजनाओं की घोषणा और कार्यान्वयन किया है। हालांकि योजनाएं प्रगतिशील थीं, लेकिन सैनिटरी नैपकिन की खराब गुणवत्ता के कारण होने वाले दुष्प्रभावों को नोट करना आवश्यक था। डाइऑक्सिन और ट्राइहैलोमीथेन जैसे विषाक्त पदार्थों का उपयोग किया गया था। उन्होंने दावा किया कि इससे कैंसर, बांझपन, हार्मोनल असंतुलन और कई मासिक धर्म संबंधी विकार जैसी बीमारियां हो सकती हैं।
याचिकाकर्ता ने कहा कि सैनिटरी नैपकिन और डायपर स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए पूरी तरह से बायोडिग्रेडेबल और रासायनिक मुक्त घटकों से बने होने चाहिए। उन्होंने सरकार को एक अभ्यावेदन भेजा, लेकिन इस संबंध में कोई कदम नहीं उठाया गया, उन्होंने कहा। उन्होंने सरकारों को निर्माताओं के लिए उपयोग की जाने वाली सामग्रियों का उल्लेख करना अनिवार्य करने का निर्देश देने की मांग की।
न्यायमूर्ति टीएस शिवगनम और न्यायमूर्ति एस अनंती की खंडपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता ने एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया था। कोर्ट ने केंद्र और राज्य को मामले में जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि वह जगह में मापदंडों का पता लगाना चाहती है। मामले की सुनवाई सात जुलाई तक के लिए स्थगित कर दी गई।


