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गाजियाबाद में समस्या जस की तस, अधिकारियों के बीच शिकायत बनी फुटबॉल |

नई शिकायत में शिकायतकर्ताओं द्वारा प्राइवेट जमीन पर सरकारी धन का दुरूपयोग करने के लिए नगर पालिका परिषद मोदीनगर के अधिकारियों को दंड देने तथा सरकारी धन से निर्मित सड़क के टाइल्स तोड़कर निजी पार्किंग व गार्डन बनाने के लिए 3/4 सरकारी संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम के तहत कार्यवाही की मांग की गयी है |

नगर पालिका परिषद मोदीनगर द्वारा निर्मित रोड पर अवैध कब्जा नहीं हटवा सकी पालिका | अतिक्रमणकारी ने नगर पालिका द्वारा निर्मित रोड पर बनवा ली पार्किंग और गार्डन |

मोदीनगर। नगर पालिका परिषद मोदीनगर में अवैध कब्जे का एक मामला प्रकाश में आया है। शिकायत को अधिकारी एक दूसरे के पाले में डालते रहे लेकिन 6 माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी समस्या अभी भी जस की तस है।

शिकायत के निस्तारण पर उप जिलाधिकारी की रिपोर्ट के अनुसार अतिक्रमण का स्थान प्राइवेट है या सार्वजनिक कोई रिकॉर्ड नहीं। लेकिन नहीं बताया कि प्राइवेट जगह पर नगर पालिका परिषद मोदीनगर ने सरकारी धन से टाइल लगाकर रोड निर्माण कैसे कर दिया।


 

शिकायतकर्ता ने बताया उसने 28 जुलाई को पालिका परिषद ने जो रोड बनाया था उस रोड पर हो रहे अवैध अतिक्रमण की सूचना नगर पालिका परिषद मोदीनगर को दी थी लेकिन पालिका ने इसके विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की । इस मामले की शिकायत जब जनसुनवाई पोर्टल पर की गई जिसकी आई.जी.आर.एस. संख्या 41014022000135 है तो तहसील मोदीनगर लेखपाल की रिपोर्ट पर उसे निजी संपत्ति होना दर्शा कर खारिज कर दिया।

नई शिकायत में शिकायतकर्ताओं द्वारा प्राइवेट जमीन पर सरकारी धन का दुरूपयोग करने के लिए नगर पालिका परिषद मोदीनगर के अधिकारियों को दंड देने तथा सरकारी धन से निर्मित सड़क के टाइल्स तोड़कर निजी पार्किंग व गार्डन बनाने के लिए 3/4 सरकारी संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम के तहत कार्यवाही की मांग की गयी है |

इस पर शिकायतकर्ता का कहना है कि इसका कोई स्थलीय निरीक्षण नहीं किया गया तथा यह भी नहीं बताया गया कि पालिका ने उस निजी संपत्ति पर टाइल्स लगाकर निर्माण क्यों कराया? इसके बाद मामले की शिकायत मेरठ के मंडलायुक्त से की गई। मामले का संज्ञान लेते हुए मंडलायुक्त ने जिलाधिकारी गाजियाबाद दिनांक 19/07/22 को  एक पत्र जारी किया  जिसमें आदेशित किया गया कि मौके पर जाकर अवैध कब्जा हटवा कर एक माह में कार्रवाई कर सूचित किया जाए | इस क्रम में अवैध अतिक्रमण हटवाने को नगर पालिका परिषद मोदीनगर ने आदेश के 1 माह बाद बताया कि अतिक्रमण कर्ता ने नगर पालिका द्वारा लगाए टाइल्स को उखाड़कर अतिक्रमण कर लिया है और उप जिलाधिकारी  मोदीनगर से पुलिस बल की मांग कर भूमि पर किए गए अवैध कब्जे को हटाने की बात कही |  इस समय अंतराल में अतिक्रमणकर्ता द्वारा फुटपाथ को चबूतरे, कार पार्किंग की जगह और गार्डन में परिवर्तित कर दिया | इसके बाद थाने में मामले की शिकायत करने पर थाना पुलिस द्वारा अवैध कब्जे की बात को स्वीकार किया गया, परंतु मामले को नगर पलिका के अंतर्गत दिखाकर बंद कर दिया गया|

शिकायतकर्ता ने जब दोबारा अतिक्रमण हटाने की मांग की तो नगर पालिका परिषद ने जनसुनवाई पोर्टल पर आपत्ति लगाते हुए बताया कि कब्जा की गई भूमि का सिविल न्यायालय में वाद दायर है इसलिए कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती । एक बार फिर शिकायतकर्ता ने मंडलायुक्त से भूमि को कब्जा मुक्त कराने सरकारी भूमि को क्षति पहुंचाने के संबंध में शिकायत की है। मंडलायुक्त ने मामले का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी को जांच के लिए निर्देशित किया है। शिकायत कर्ता का कहना है कि

इस पूरे प्रकरण में अधिकारियों की साठगांठ से अतिक्रमण कर्ता को अवैध कब्जा करने का समय दिया गया तथा अवैध कब्जे को संरक्षित करने के लिए सिविल वाद की सलाह भी दी गयी |

अब शिकायतकर्ता ने नयी शिकायत में इस प्रकरण में सरकारी संपत्ति को छति पहुंचाने पर रिकवरी की मांग की है जिसका सिविल वाद से कोई संबंध नहीं है | उसने जो प्रार्थना पत्र दिया है उसमे जो प्रमुख विन्दु इस प्रकार है जिसमे नगर पालिका परिषद के अधिकारियो और कर्मचारियों ने प्राइवेट जगह पर सरकारी सड़क कैसे बनवा दी और सरकारी धन से बनी सड़क तोड़ने पर 3/4 सरकारी संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम के तहत कार्यवाही की मांग की है |

Written by Chief Editor

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